मुरैना. परीक्षा फीस बचाने के फेर में पोरसा के दो प्राइवेट स्कूल और बरवाई के एक अनुदान प्राप्त स्कूल के संचालकों ने सामान्य वर्ग के 750 छात्रों को अनुसूचित जाति-जनजाति का बताकर परीक्षा फॉर्म भरवा दिए। जांच में यह धोखाधड़ी उजागर हो गई। अब परीक्षा से मात्र 4 दिन पहले माध्यमिक शिक्षा मंडल से इन तीनों स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की सिफारिश की है। साथ ही इन स्कूलों के छात्रों के परीक्षा फॉर्म भी निरस्त कर दिए हैं।
ऐसे में अब इन स्कूलों के 750 विद्यार्थी 10वीं और 12वीं की परीक्षा नहीं दे पाएंगे। इसके साथ ही बरवाई के अनुदान प्राप्त स्कूल का अनुदान रोकने की कार्रवाई भी की जा रही है। जांच में यह भी पता चला है कि इन स्कूलों में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की परीक्षा में पास कराने का ठेका लेकर छात्रों के फॉर्म भरवाए थे क्योंकि छात्रों के एडमिशन संबंधी कोई रिकॉर्ड स्कूल में नहीं मिला।
बड़ा सवाल- कियोस्क सेंटर को आईडी और पासवार्ड किसने दिया : हाईस्कूल व इंटर के 750 परीक्षा फॉर्म भरने के लिए स्कूल संचालकों को बोर्ड द्वारा जारी आईडी व पासवर्ड अंबाह के श्रीकृष्ण एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेंटर के संचालक को कैसे मिला और किसने दिया? यह बड़ा सवाल है। जांच में इस संबंध में जब स्कूल संचालकों के बयान लिए गए तो उनका कहना था कि उनके आईडी व पासवर्ड को किसी ने चुरा लिए हैं। उनका दुरुपयोग कर कियोस्क सेंटर से परीक्षा फॉर्म भरे गए हैं। जांच के बाद जब स्कूलों की मान्यता समाप्त हुई और छात्रों के परीक्षा फॉर्म निरस्त किए गए, तब स्कूल संचालकों ने आईडी व पासवर्ड चोरी की शिकायत अंबाह पुलिस से की है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।
परीक्षा फीस के रूपए बचाने के लिए किया फर्जीवाड़ा: पोरसा के एनएएस हायर सेकंडरी स्कूल, द विलेज एलीमेंटरी एजुकेशन स्कूल और बरवाई के अनुदान प्राप्त हाईस्कूल के 750 परीक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म अनुसूचित जाति व जनजाति कोटे से भरवा दिए गए जबकि सभी छात्र-छात्राएं सामान्य वर्ग के हैं। स्कूल संचालकों ने ऐसा इसलिए किया ताकि प्रति छात्र परीक्षा फीस के रूप में दिए जाने वाले 1000 से लेकर 1100 रुपए बचाए जा सकें। फर्जीवाड़ा कर स्कूल संचालकों ने पौने पांच लाख रुपए बचा लिए। परीक्षार्थियों को अजा-अजजा वर्ग का दर्शाकर स्कूल संचालकों ने हाईस्कूल व इंटर परीक्षा फॉर्म भरने के लिए 25 रुपए प्रति छात्र के मान से सिर्फ पोर्टल शुल्क ही खर्च किया। डीईओ के पास इस संबंध में शिकायत आई तो जांच कराई गई। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ गया। इसके बाद कलेक्टर ने कार्रवाई के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को प्रतिवेदन भेजा था।
अंबाह के कियोस्क सेंटर से भरवाए परीक्षा फॉर्म : जांच के दौरान पता चला कि पास कराने का ठेका देने वाले स्कूल संचालकों ने अंबाह के श्रीकृष्ण एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेंटर से 750 परीक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म भरवाए थे। इसमें पोरसा का एनएएस हायर सेकंडरी स्कूल और द विलेज एलीमेंटरी एजुकेशन स्कूल के अलावा बरवाई का स्कूल शामिल है। बरवाई के स्कूल से 266, द विलेज स्कूल से 134 (10वीं) व एनएएस स्कूल से 350 (192 12वीं और 158 10वीं) छात्र-छात्राओं के परीक्षा फाॅर्म भरवाए गए थे। यह सभी फॉर्म माध्यमिक परीक्षा मंडल ने निरस्त कर दिए हैं।
जांच समिति को स्कूलों में नहीं मिला छात्रों का रिकॉर्ड : डीईओ सुभाषचंद्र शर्मा द्वारा गठित जांच समिति ने जांच में पाया कि जिन छात्रों के परीक्षा फाॅर्म भरवाए गए हैं, उनका स्कूल में भर्ती होने संबंधी कोई रिकाॅर्ड ही नहीं है। प्रवेश फाॅर्म व स्कूल त्याज्य प्रमाण-पत्र आदि दस्तावेज स्कूल में नहीं मिले। इसके अलावा छात्रों से ली जाने वाली फीस का भी कोई ब्यौरा नहीं मिला। श्री शर्मा ने बताया कि पोरसा के दाे प्राइवेट स्कूलों की मान्यता बोर्ड ने निरस्त कर दी है। इन दो स्कूलों के साथ बरवाई के एक स्कूल के कुल 750 परीक्षार्थियाें के फाॅर्म भी बोर्ड ने निरस्त कर दिए हैं। अब यह छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे। इन छात्रों का एडमिशन संबंधी रिकॉर्ड भी स्कूल में नहीं मिला है।
दोनों स्कूल संचालकों ने ये कहा
एनएएस हायर सेकंडरी स्कूल के संचालक रामप्रताप तोमर ने कहा कि हमारे स्कूल से 10वीं के छह और 12वीं के तीन छात्र परीक्षा देंगे। बाकी छात्राें के फॉर्म हमने नहीं भरवाए। वहीं, द विलेज एलीमेंटरी एजुकेशन स्कूल के संचालक संजय शर्मा ने बताया कि स्कूल की मान्यता 10वीं तक है। हमने 9वीं तक ही एडमिशन किए हैं। 10वीं के फॉर्म किसी और ने भरवाए हैं।